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Neha Waagh.....
Shamoli Sarkar....
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एक पडाव...!सुलेखा पर चलते-रुकते...रुकते-चलते.....एक साल होने जा रहा है....पिछले साल अनायास ही बिना किसी मकसद के २० मई को सुलेखा पर आ गया था ...शायद सब कुछ पहले से निर्धारित सा लगता है....कुछ भी लिखना अभी प्लान मे नही था...ऒर नेट पर कुछ लिखूगा यह कभी सोचा भी ना था....लेकिन यही पर समझ मे आ जाता है कि हम कितना भी कहे हम कर्ता नही है हम केवल एक माध्यम है ऒर....करवाने वाला कोई ऒर ही है...एक साल तक लगातार सुलेखा पर लिखता रहूगा यह मेरे नेचर के हिसाब से आसान भी नही था...लेकिन यह सम्भव हो पाया सुलेखा के कुछ मित्रो के लगातार हौसला-अफ़जाई ऒर उनके सहयोग के कारण....जिसकी मै आगे चर्चा करूगा...यह ब्लाग लिखने का मेरा मकसद भी यही था कि मै उन मित्रो का आभार व्यक्त करू जिनके प्रयास की वजह से यह सफ़र यहा तक पहुचा...मुझे याद आता है कि मैने ब्लाग-स्पाट ऒर सुलेखा पर एक ही दिन अपना रजिस्ट्रेशन करवाया था लेकिन लिखने का प्लान सुलेखा पर किया ...क्योकि यहा हिन्दी मे बहुत कम लिखा जा रहा था....कुछ मेम्बर जैसे कि प्रिया...नूपुर...आनिल..नेहा.. ही हिन्दी मे जब कभी लिख रहे थे....जब-कि ब्लागर्स पर अलग से हिन्दी के लिये स्पेस था....इसलिये मैने सुलेखा को चुना क्योकि यहा पर हिन्दी के लिये ऒर प्रयास की जरूरत थी....काम मुश्किल जरूर था...क्योकि यहा पर मुझे बिना सुलेखा के सहयोग ओर प्रोत्साहन के हिन्दी के लिये जगह बनानी थी....अभी इस मकसद मै कितनी कामयाबी मिली है कह नही सकता लेकिन आज जब देखता हू कि शायद ही कोई दिन एसा जाता हो जब हिन्दी मे कोई भी रचना ना पोस्ट होती हो....तो देखकर खुशी होती है ...ऒर अब सुलेखा पर हिन्दी मे रचनाये पढी भी जा रही है...यह उन सभी लोगो के प्रयास से सम्भव हुआ जिन्होने हिन्दी मे लिखा ऒर हिन्दी मे लिखने वालो को प्रोत्साहित किया.....ऒर यह प्रयास जारी रखा जाना चाहिये....! जब पीछे मुड कर देख्ता हू तो कई दोस्त सुलेखा के याद आते है जो इस सफ़र के सह्भागी बने,साथ छोटा रहा हो या बडा लेकिन इस यात्रा को इस पडाव तक पहुचाने मे सभी का सहयोग रहा जिसके लिये मै सभी का आभारी हू जो नाम अभी तक दिमाग मे है उनका उल्लेख जरूर करना चाहूगा....पहली दोस्त...!सुलेखा पर शायद पहली रचना मैने नेहा की ही पढी थी ऒर पहली ही रचना ने मुझे प्रभावित किया था...जिसके बाद मैने पहली फ़्रेन्ड की इन्विटेशन भी नेहा को भेजी थी....ऒर मै नेहा का आभारी हू कि उसने मेरा आमन्त्रण स्वीकार किया इस तरह सुलेखा की पहली दोस्त के नाते हमेशा मेरे मन मे उसके लिये अलग स्थान है,हालाकि आज तक शायद ही कोई कमेन्ट उसका मेरी पोस्ट पर आया हो ऒर मुझे मालूम भी नही की नेहा ने कोई मेरी रचना पढी भी है या नही ...लेकिन इस बात का कोई भी मलाल मन मे नही है....नेहा आपका बहुत-बहुत आभार ऒर धन्यवाद...इज्जत बक्खशने के लिये...!दूसरा कमेन्ट पहली रोशनी....!पहला कमेन्ट सुमित का मिला लेकिन वह आखिरी भी था फ़िर भी सुमित आपका आभार...!दूसरा कमेन्ट सामोली सरकार ( हिन्दी मे यही नाम बोला जायेगा या नही कह नही सकता ) का मिला जिसने मुझे पहली रोशनी दिखाई ऒर सही मायने मै कहू तो यह विशवास दिलाया कि मै लिख सकता हू ऒर स्वीकार भी किया जा सकता हू..सामोली भले ही इस यात्रा मे आप दो चार कदम ही चली हो लेकिन आप का वह दो-चार कदम का साथ भी नकारा नही जा सकता....उस छोटे से मगर प्रेरणा-दायी सफ़र के लिये आपका आभार ऒर शुक्रिया..!
सुलेखा की तीन देविया.....हो सकता हो किसी को देवी शब्द यहा पर उपयुक्त ना लगे लेकिन मेरे इस सफ़र मे इनका योगदान मेरे लिये देवी जैसा ही रहा है...प्रेरणास्पद..उत्साह-वर्धक...ऒर राह दिखाने वाला इस लिये मै इन्हे अपने लिये सुलेखा की देविया ही मानता हू...ऒर मेरे मन मै इनके लिये देवी वाला ही स्थान है....
पहली देवी.....Nupur / Keyaa1........सुलेखा पर अपने शुरुआती दिनो मे जब कभी भी निराशा मन मे आयी ....तो नूपुर के उत्साह-वर्धक शब्द...ऒर हौसला अफ़जाई ही होती थी जो मुझे लिखने की हिम्मत बराबर देती रहती थी साथ मे एक बार अपने कमेन्ट मे नूपुर का कोट किया हुआ शेर चलने को बाध्य करता रहा..." यू तो अकेले ही चला था जानिबे म॑जिल मगर,लोग साथ होते गये कारवा बनता गया.....नूपुर मै नही समझता कि आप तीनो देवियो का आभार अदा करने के लिये धन्यवाद शब्द पर्याप्त होगा..इसलिये आप-का तो कर्ज-दार ही रहना चाहूगा ओर धन्यवाद कह कर इस कर्ज से मुक्ती नही चाहूगा...!
दूसरी देवी....Gold21...गोल्डी मुझे ध्यान नही है कि पहली बार आपके आने के बाद मेरी कोई भी गजल आपके बिना कमेन्ट के रही हो..समयाभाव के बावजूद आपने जो इज्जत मेरी गजलो को बक्खशी है उस से मै अभिभूत हू...शायद सुलेखा पर इतनी गजल मै कभी नही लिख पाता अगर आपका सहयोग ओर हॊसला ना मिला होता...आज भी वक्त-बेवक्त किसी भी तरह से जो समय निकाल पाती हो उसके लिये मै आपका भी कर्ज दार ही रहूगा कोई शब्द नही जो इस आभार को व्यक्त कर सके.....!
तीसरी देवी....Swayamprwa...तीसरी देवी अक्सर अन्तरध्यान हो जाती है लेकिन इस कारन मेरे मन मे उनकी जगह जरा भी नही हिली है....हिन्दी भाषी ना होने के बावजूद भी मेरे शुरुआत के दिनो मे जो श्याम ने हॊसला दिया उसको मै कभी भुला नही सकता...आज भले ही वो मेरे पेज आती हो या ना आती हो लेकिन मेरे दिल मे उनके लिये सम्मन ऒर प्यार आज भी पहले की तरह बरकरार है..ऒर इस सफ़र का श्रेय उनको भी जाता है श्याम आपका भी मै कर्ज-दार ही रहूगा.....!जो मित्र थोडा आगे चलकर इस सफ़र मे शामिल हुए ओर इस सफ़र को आअगे बढाने मे अपना महत्व-पूर्ण योगदान दिया उनका उल्लेख जरूर करना चाहूगा...जिनकी वजह से इस सफ़र की अकाल म्रत्यु नही हो पायी ....जिनकी वजह से रुकते-रुकते सफ़र चलता रहा.....मुझसे पहले से प्रिया हिन्दी मे सुलेखा पर कविताए लिखती रही है...हालाकि इधर काफ़ी समय से लिखना नही हो पा रहा है ....इसके बावजूद भी वो देर रात मेरी रचनाओ को समय निकाल रही है....यह मेरे लिये उनका प्यार ही है...जो वह मेरी रचनाओ को सम्मान दे रही है....जब कोई कवि...किविताओ को सम्मान दे तो फ़िर इस से बडी बात ऒर क्या हो सकती है...प्रिया मुझे आपकी फ़रमाइस याद है...देर सबेर कभी तो वो भाव आयेगे ही तभी जरूर लिखूगा...इस सफ़र को आगे बढाने के लिये अभी आप को ऒर यात्रा करनी होगी.....!कोई भी गीत स॑गीत के बिना अधूरा रहता है वैसे ही यह ब्लाग बिना मुजिकल की चर्चा के अधूरा ही रहेगा.....मुझे मालूम है कि अपने व्यक्तिगत कारनो की वजह से म्यू सुलेखा पर ज्यादा समय नही दे पायी है...लेकिन इस सफ़र के मध्य मे जो होसला अपने खुबसूरत कमेन्ट के माध्यम से म्यू देती रही है वह मेरे लिये स॑जीवनी का कार्य करता रहा है...ऒर मै समझता हू कि जैसे उसे स॑गीत की समझ है वैसे ही वह गजलो का आ॑कलन करने मे समर्थ है....इस लिहाज से मै अपनी रचनाओ को उसके कमेन्ट के आधार पर जज कर पाता हू कि मेरी मेहनत कहा तक सफ़ल हुई है.....मै आशा कर सकता हू कि पहले की तरह ही आगे भी म्यू का सार्थक सहयोग मिलता रहेगा....!नरगिस जी अपने लिखने के अलावा अपने बेहतरीन कमेन्ट्स के लिये भी जानी जाती है....ऒर इस लिहाज से मै अपने आप को सॊभाग्य शाली समझता हू कि उनका मुझे बराबर स्नेह मिल रहा है....नरगिस जी जैसा एक भी सुधी पाठक मिलना मेरी रचनाओ के लिये सम्मान की बात है....मेरे पास उनका आभार व्यक्त करने के लिये शब्द नही मिल रहे...जब एक बार मैने सुलेखा छोडने का मन बना लिया था ऒर एक महीने तक सुलेखा से दूर रहा था तो उनका प्यार भरा आग्रह ही था जो मै यह सफ़र दोबारा शुरू कर सका....ऒर सुलेखा पर अपना पहला साल पूरा कर सका....नरगिस जी आपका बहुत-बहुत शुक्रिया....!हालाकि सूद साहब के अलावा पुरुष मित्र ओर भाई मेरे पेज पर आज-कल कम ही दिखते है लेकिन जो भाई पहले दिखा करते थे आज किसी कारन कम आ पाते है....लेकिन इस वजह से मै उन के कर्ज से